हिन्दू समाज एक तो धार्मिक पुस्तक पढ़ते नहीं हैं क्यों की मौलवियों को तनख्वाह मिलेगा ,वेद पाठी ज्ञानी को नहीं और अगर पढ़ते भी हैं तो रामायण और भगवत गीता पढ़ते हैं , महाभारत नहीं। हिन्दू समाज का भगवान राम का मर्यादा पसंद है श्री कृष्ण का कूटनीति नहीं। हिन्दुओं को कूटनीति नहीं आती। हिन्दू और मुस्लिम समाज में बहुत बड़ा अंतर यह है की मुस्लिम समाज आतंकियों और डॉन को मसीहा बना देंगे, बॉलीवुड उन पर फिल्म भी बनाता है लेकिन हिन्दू समाज एक भूल के लिए हमेशा के लिए ख़त्म कर देता है । राममंदिर पर कटाक्ष करने वाले हिन्दू ही हैं , अगर राममंदिर के नाम पर वोट मिलना होता तो 30 साल नहीं लगता और इन 30 साल में बीजेपी को 10 साल का ही सत्ता मिला बाकि कांग्रेस की सरकार थी।
हिन्दू भोले या मुर्ख नहीं हैं ,अतिआदर्शवाद का शिकार है। 'रघुपति राघव राजा राम..... ' सुना कर अतिआदर्शवादी बना दिया गया की राममंदिर के ही विरोधी हैं। बीजेपी में हिन्दू भगवान राम की तरह युद्ध में भी मर्यादा खोजता है भले ही स्वयं में मानवता बिलकुल शून्य हो। बीजेपी की भी गलती है हिन्दुओं के मानसिकता को समझना चाहिए था कि मुस्लिम और हिन्दू समाज में अंतर् है। वो बीजेपी समर्थक को 'भक्त' कहते हैं बल्कि सबसे पहले हिन्दू ही बीजेपी का साथ छोड़ते हैं। बंगाल जीतना आसान नहीं था, उस चुनाव के लिए बढ़ते कोरोना केस पर कोई एक्शन ना लेना एक अमानवीय और कभी ना भूलने वाली गलती है।
खेला हो गया