Sunday, 2 May 2021

कोरोना काल और बीजेपी का भविष्य

 हिन्दू समाज एक तो धार्मिक पुस्तक पढ़ते नहीं हैं क्यों की मौलवियों को तनख्वाह मिलेगा ,वेद पाठी ज्ञानी को नहीं और अगर पढ़ते भी हैं तो रामायण और भगवत गीता पढ़ते हैं , महाभारत नहीं। हिन्दू समाज का भगवान राम का मर्यादा पसंद है श्री कृष्ण का कूटनीति नहीं। हिन्दुओं को कूटनीति नहीं आती।  हिन्दू और मुस्लिम समाज में बहुत बड़ा अंतर यह है की मुस्लिम समाज आतंकियों और डॉन को मसीहा बना देंगे, बॉलीवुड उन पर फिल्म भी बनाता है  लेकिन हिन्दू समाज  एक भूल के लिए हमेशा के लिए ख़त्म कर देता है । राममंदिर पर कटाक्ष करने वाले हिन्दू ही हैं , अगर राममंदिर के नाम पर वोट मिलना होता तो 30 साल नहीं लगता और इन 30 साल में बीजेपी को 10  साल का ही  सत्ता मिला बाकि कांग्रेस की सरकार थी। 

हिन्दू भोले या मुर्ख नहीं हैं ,अतिआदर्शवाद का शिकार है। 'रघुपति राघव राजा राम.....  ' सुना कर अतिआदर्शवादी बना दिया गया की राममंदिर के ही विरोधी हैं। बीजेपी में हिन्दू भगवान राम की तरह युद्ध में भी मर्यादा खोजता है भले ही स्वयं में मानवता बिलकुल शून्य हो। बीजेपी की भी गलती है हिन्दुओं के मानसिकता को समझना चाहिए था कि मुस्लिम और हिन्दू समाज में अंतर् है। वो बीजेपी समर्थक को 'भक्त' कहते हैं बल्कि सबसे पहले हिन्दू ही बीजेपी का साथ छोड़ते हैं। बंगाल जीतना  आसान नहीं था, उस चुनाव के लिए बढ़ते कोरोना केस पर कोई एक्शन ना लेना एक अमानवीय और कभी ना भूलने वाली गलती है। 

खेला हो गया 

Monday, 26 April 2021

महामारी काल में राममंदिर का मुद्दा

 जो आजकल राममंदिर पर कटाक्ष कर रहे हैं , वो आर्टिकल 370 की बात नहीं करेंगे ? OROP की बात नहीं करेंगे ? जनधन योजना की बात नहीं करेंगे ? डिजिटल इंडिया की बात नहीं करेंगे ? टॉयलेट और गैस चूल्हा की बात नहीं करेंगे ? आधार कार्ड से फर्जी अध्यापक पकड़ा रहे हैं उसकी बात नहीं करेंगे ? और ना जाने  क्या क्या फर्क आया मोदीजी के आने से, सब भूल गए क्यूंकि अच्छी बातें भूल जाती हैं और दुःख देने वाली बातें याद रहती हैं।  एक और बात ट्रिपल तलाक़ की बात नहीं करेंगे ? दिमाग पर जोर डालो 2017 में जब चुनाव हुआ था तब बीजेपी कौन सा मुद्दा लाई थी।  राममंदिर ? नहीं, ट्रिपल तलाक़।  चुनाव के प्रचार के समय बीजेपी अपने मुख्यमंत्री उम्मीदवार  का चेहरा सामने लाई थी ? नहीं , चुनाव जीतने  के बाद योगीजी को मुख्यमंत्री बनाने का घोषणा किया गया था। अगर आप यह कहते हो की राममंदिर के कारण बीजेपी के सरकार बनी तो आप महामूर्ख हैं और आप उनमें से हैं जो आम नागरिक की तरह नहीं बल्कि एक पार्टी के कार्यकर्त्ता की तरह बातें करते  हैं। 2019 में बीजेपी हार जाती अगर राहुल गाँधी को प्रधानमंत्री का उम्मीदवार नहीं बनाया जाता।  कमजोर विरोधी का होना भी जीत का कारण होता है।  

इस महामारी के समय इस तरह के कटाक्ष करने वाले वो लोग हैं जिन्होंने ने बीजेपी को वोट नहीं दिया है सच्चे मन से, नहीं तो इस तरह का कटाक्ष नहीं करते। 

बीजेपी ने कुछ गलतियां  की हैं वो हमें भी दिख रहा है लेकिन इस तरह की गलती दूसरे सरकारों और आयोगों में भी निकाला जा सकता है। सच तो यह है की अपने देश में ऐसे बहुत लोग हैं जो lockdown से डरे हुए हैं , हम बर्फ वाले इलाके में नहीं रहे हैं की हमें lockdown का आदत हो। आर्थिक और मानसिक दोनों रूप से बहुत बुरा असर पड़ता है।  

यह वही लोग हैं जो पिछले साल lockdown से चिढ़ रहे थे  और यह कह रहे थे की एक तानाशाह की तरह अकेले निर्णय ले लिया राज्य सरकारों को जिम्मेदारी नहीं दी। आज वही लोग केंद्र सरकार को कोस रहे हैं। पिछले साल हमारे पास मास्क , sanitizer और PPE किट नहीं था, भारत ने स्वंय इन सब चीजों को बनाया। जो देश हर छोटी बड़ी चीज के लिए चीन पर निर्भर था वो महामारी में स्वंय उपकरणों और संसाधनों का निर्माण किया है और 2 टिका भी बना लिया। 

मुझे ऐसे लोगों के बातों का कोई फर्क नहीं पड़ता , बस ईश्वर से प्रार्थना कर रही हूँ यह सब जल्दी से थम जाये। 

आप का पूरा अधिकार है सरकार से नाराज होने का , अपने अधिकारों के लिए लड़िये। सरकार से उम्मीद कर रहे हैं तो सरकारी विद्यालयों , सरकारी अस्पतालों का भी प्रयोग किया करें। ऐसी सरकार चुने जो आपको सभी मुलभुत सुवधाएं और संसाधन मुहैया कराये ,जाति और धर्म की राजनीती ना हो।  राममंदिर हमारी सांस्कृतिक पहचान है इसे राजनीती का हिस्सा ना बनायें। 

जय श्री राम 

जय हिन्द