Thursday, 3 September 2020

कितना कमा लेते हो?

 "कितना कमा लेते हो?" यह पूछने के बजाय यह पूछने काआदत डालिये "क्या हाल चाल है ?", "क्या कर रहे हो?", "आगे का क्या सोचा है ". क्यूंकि हो सकता है वो इंसान आप की तरह सरकारी नौकरी करके ए सी का हवा लेने के बजाय कूलर के हवा में ही अपनी जिंदगी बिताना चाहता हो और आप से थोड़ा सा इज्जत चाहता हो। उसके बेरोजगार होने का बहुत से वजह हो सकता है 

1. वो एक खिलाड़ी रहा हो जिसके पास काबिलियत थी एक अच्छा स्पोर्ट्समैन बनने का ,लेकिन राजनीती, दुरव्यवस्था या पैसे के अभाव में तरक्की ना कर पाया हो। लेकिन अभी भी वो एक अच्छा ट्रेनर बन सकता है अगर उसके आईडिया पर कोई पैसा इन्वेस्ट कर दे।  

2 . वो एक इंजीनियर हो जिसमें मार्क ज़ुकरबर्ग , बिल गेट्स , एलोन मस्क बनने की क्षमता है लेकिन भारत की सड़ा हुआ अर्थव्यवस्था की वजह से वो लोन और टैक्स के बोझ में दब गया या उसे मौका ही ना मिला हो अपना टैलेंट दिखाने का।  अनुभव है , कोई पूछेगा तो मैं उसका पता बता दूंगी। 

3 . वो एक अच्छा डांसर , अच्छा एक्टर , अच्छा राइटर या पेंटर हो लेकिन आज कल के महंगाई , भ्रस्टाचार और परिवेश में उसकी कमाई नहीं हो पा रही हो  और संघर्ष कर रहा हो।  उसके संघर्ष की प्रसंशा करिये क्यूंकि आप उसे खाने को रोटी नहीं दे रहे हैं , यह उसकी जिंदगी है ,उसने चुना है इस जीवन शैली को। ऐसे लोगों को भी देखा है। एक जूनून पालना भी नशा होता है. सुशांत सिंह राजपूत जैसा बनना हर किसी की बात नहीं है जिसने एक्टिंग और डांस के लिए इंजीनियरिंग छोड़ दी। 

4 . वो बिज़नेस करना चाहता हो , या कोई स्टार्ट अप खोलना चाहता हो , उसके पास अच्छा आईडिया हो लेकिन पैसे नहीं हैं , टीम नहीं है उसके पास।  हो सकता है उसका टैलेंट दूसरों के आर्डर पर निखर कर नहीं आता हो , खुद के स्टार्ट अप से अपना टैलेंट का इस्तेमाल करें या इतने से में वो खुश हो।  अलीबाबा के संस्थापक कइयों बार हारा है , उसकी जीवनी पढ़ कर देखिये या यूट्यूब पर वीडियो होगा। 

5. कोई पत्रकार , वकील , डेंटिस्ट  या कोई भी हो सकता है जिसमें सरकारी नौकरी की कमी होने के नाते संघर्ष कर रहा हो। कुछ व्यवसाय ऐसे हैं की बहुत मेहनत से पढ़ाई करके डिग्री मिला लेकिन आज कल के माहौल में अच्छी कमाई नहीं हो पा रही है। इस महंगाई और प्रतिस्पर्धा के दौड़ में संघर्ष करने वालों के प्रति सहानुभूति रखिये। 

6.हो सकता है वो भाग दौड़ के रेस का हिस्सा ही ना बनना चाहता हो. उन्हें खेती करना अच्छा लगता हो या समाज सेवा करना चाहता हो। 

7. हो सकता है वो व्यक्ति अपना घर छोड़ कर दूसरे जगह नहीं जाना चाहता हो 

8. अगर वो महिला है तो उसे नौकरी ना करने के बहुत बड़ा कारण बच्चे हैं , इसमें कोई गलत बात नहीं है. अगर पति की कमाई से वो खुश है तो बच्चों की परिवरिश करना कोई गलत निर्णय नहीं।  दिखावे और पैसे कमाने के जूनून में बच्चे की परिवरिश ना सके तो बुढ़ापे में माँ बाप ही पछताते हैं , तब पड़ोसी या रिश्तेदार पीठ पीछे कानाफूसी करने के अलावा कुछ नहीं करेंगे। 

9. कुछ किस्मत के मारे भी होते हैं , उनके हालात या तबियत सही ना होने की वजह से अच्छा नौकरी पाने से चूक गए। और कभी कभी जैसा सोचा वैसा नहीं होता।  लेकिन है तो इंसान न। आप तो उसे खाने को रोटी नहीं देते तो कम से कम अच्छे मित्र या रिश्तेदार तो बन सकते हैं। 

यह तो हुई बेरोजगारी के कुछ कारण , एक और कारण है वो है सरकारी नौकरी की तैयारी । मैं सरकारी और प्राइवेट दोनों के पक्षधर हूँ , दोनों के होने से आपस में प्रतिस्पर्धा बनी रहती है , कोई भी पूर्ण समाजवाद या  पूर्ण पूंजीवाद सफल नहीं हुआ है। दोनों का अपना अपना स्थान और महत्व है , दिक्कत बस लोगों के सोच में है और व्यवहार में है। सबसे पहले मैं बताउंगी की प्राइवेट के क्या फायदे हैं और उसके बाद सरकारी के , क्यूंकि आजकल बेरोजगारी और निजीकरण पर बहुत बहस हो रहा है। 

प्राइवेट संस्था या कंपनी के फायदे -

1.सरकारी संस्था या कंपनी को प्रतिस्पर्धा मिलता है , कभी कभी कम संसाधन और कम लागत के प्राइवेट संस्था या कंपनी अच्छा परिणाम देते हैं.
2. दूसरों को अपना कंपनी खोलने का मौका मिलता है और रोजगार की संभावनाएं बढ़ जाती हैं. टैलेंट और योग्यता को उभरने को मौका मिलता है। 
3. टेक्नोलॉजी सरकारी के तुलना में प्राइवेट में जल्दी अपडेट हो जाता है .
4. प्राइवेट संस्था की तरह कोई भी निर्णय लेने में समय नहीं लगता क्यूंकि मालिक एक ही होता है , चाहे मालिक कोई भी निर्णय लें , कर्मचारी उसे मानते हैं। लेकिन सरकारी में अगर रूलिंग पार्टी पसंद ना हो तो हर निर्णय पर राजनीती होती है 
5. मेहनती लोगों को प्रोमोशन मिलने का मौका ज्यादा मिलता है। सरकारी में एक समय के बाद सभी कर्मचारियों का पदोन्नति होता है चाहे कोई कर्मचारी मेहनती और ईमानदार हो ना हो। 
6. भ्रष्टाचार की संभावना कम होती है 

ये कुछ उदहारण हैं , जिससे पता चलता है की प्राइवेट सेक्टर की भी आवश्यकता है और इनको भी फलने फूलने का मौका मिलना चाहिए। इनके ऊपर टैक्स और लोन का इंटरेस्ट इतना नहीं होना चाहिए की प्राइवेट सेक्टर टिक ना पाए। 

प्राइवेट सेक्टर महंगा होता है क्यूंकि वो टैक्स भरता है लेकिन सरकारी विभाग सस्ता होता है क्यूंकि वहां सरकारी खजाने से पैसे लगाए जाते हैं और सरकारी खजाना में कहीं ना इनकम टैक्स और अन्य टैक्स से भरता है। मतलब सरकारी विभाग भी प्राइवेट सेक्टर और एग्रीकल्चर पर निर्भर है। 

अगर कोई व्यक्ति बहुत मेहनती है तो वो सरकारी कर्मचारी से भी ज्यादा कमा सकता है लेकिन सरकारी कर्मचारी को एक समय सीमा के बाद ही पदोन्नति मिलती है चाहे जितना कमा लें। अगर कोई व्यापार शुरू किया है तो उसका लाभ आने वाली पीढ़ी करेगी लेकिन नौकरी में तभी तक फायदा है जब तक आप नौकरी कर रहे हैं और उसका लाभ सिर्फ आपको मिलेगा। 
अगर पितृ आश्रित नौकरी मिलता भी है तो एक एहसान की तरह माना जाता है लेकिन व्यापार पर बेटे का अधिकार की तरह लिया जाता है। पेंशन भी एक सीमा में ही मिलता है व्यापार एक बार सफल हो गया तो आपके बुढ़ापे में भी कमाई बढ़ता रहेगा। 
कुछ सरकारी नौकरी में अपने शहर से दूर दूसरे शहर या जगह जाना पड़ता है , लेकिन प्राइवेट जॉब में अपने मन के मुताबिक जगह की कंपनी खोज सकते हैं और व्यापार में भी अपने अनुसार जगह खोजते हैं या घर के पास ही व्यापार करते हैं। 
सबके जीवन का उद्देश्य सिर्फ पैसा कमाना नहीं होता , कुछ अपने पैशन को फॉलो करते हैं - स्पोर्ट्समैन , एक्टर, राइटर, पोएट , सिंगर , पेंटर , ट्रैवलर , आदि आदि बनना चाहते हैं तो उनको उनकी जिंदगी जीने दें। बस अपने मित्र , पड़ोसी या रिश्तेदार को उसके कमाई से ना तौलें, उसका सोच और व्यवहार देखें।